あらすじ
‘राख, धुआँ, अंगार’ एक सशक्त हिंदी उपन्यास है, जो समाज की दोहरी सोच, जातिगत अहंकार और स्त्री के मौन संघर्ष को उजागर करता है। माधुरी के जीवन के माध्यम से यह कथा विश्वास, प्रेम और टूटन की परतें खोलती है, जहाँ सपने धीरे-धीरे राख बन जाते हैं और भीतर अंगार सुलगते रहते हैं। यह उपन्यास परंपराओं के नाम पर होने वाले अन्याय, भावनात्मक शोषण और स्त्री की विवशताओं पर गहरे सवाल उठाता है। संवेदनशील भाषा और तीव्र भावनात्मकता के साथ लिखा गया यह उपन्यास पाठक को सोचने पर मजबूर करता है और सामाजिक सच से रू-बरू कराता है।
ISBN: 9789364028851ASIN: 9364028856
