दुनियां में संसार में जमाने की भीड़ होने के बाद भी हर इंसान के मन में एक सूनापन सा खालीपन सा रहता है जो उसे तन्हा होते ही कचोटने लगता है कोई भी इंसान इस मन के सूनेपन से बच नहीं पाता है हर किसी के जीवन में कोई कमी रह जाती है जो वह लाख प्रयास करने के बाद लाख कोशिशें करने के बाद भी पूरी नहीं।कर पाता है और इंसान के मन का यह सूनापन यह खालीपन कभी भी दूर नहीं हो पाता है हर पल उसके साथ जीवन पर्यन्त बना रहता है शायद इसी का नाम ज़िंदगी है।