भाग्य दुर्भाग्य के बीच में जूझती एक संर्घष की कहानी हैं। दोनो ही बदलाव का सूर्य उदय करतें हैं। कर्म का फल पाप पुण्य रुप में देने के लिए विकल्प रुप का साक्षात्कार हो ही जाता हैं। संर्घष की कसौठी पर उतरना सरल नहीं है। मार्गदर्शक गुरु का साथ मिल जायें तो न्याय करने में पक्षपात नहीं होता हैं। पूर्ण निष्ठा से पाप पुण्य का भुगतान करती हैं। हमें अपने कर्मो का फल देनें के लिए ही समक्ष कोई न कोई प्रस्तुति हो ही जाता हैं। ऐसी ही कहानी है दुर्भाग्य"एक बदलाव"