あらすじ
दीनदयालजी का व्यक्तित्व जितना सरल था; उनका जीवन उतना ही कठिन था। इसी प्रकार दीनदयालजी के विचारों को पढ़ना जितना सरल है; उन्हें समझना उतना ही कठिन है। जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है; जिसे उन्होंने अपने चिंतन के दायरे में शामिल न किया हो। सामाजिक विषयों से लेकर आर्थिक विषयों तक उन्होंने जितने आयामों के साथ उन्हें विश्लेषित किया है; वह अद्भुत है। यह उनके विचारों की शाश्वतता ही है कि उनके देहावसान के 48 वर्ष बीतने के बाद भी वे अप्रासंगिक नहीं हुए हैं। उनका ‘एकात्म मानववाद’ भारतीय संस्कृति का वह जयघोष है; जिसकी गूँज कभी समाप्त नहीं होगी। दीनदयालजी का अध्ययन क्षेत्र बहुत विस्तृत और विस्तीर्ण था। समाज-संस्कृति-राजनीति का शायद ही कोई विषय हो; जिस पर उनकी दृष्टि न गई हो। उनकी इसी दूरदृष्टि और चिंतन ने कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं का पथ-प्रशस्त किया है। वर्तमान में केंद्र और कई प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी का शासन है। वे सब दीनदयालजी के चिंतन को व्यवहार रूप देकर राष्ट्र-निर्माण के काम में संलग्न हैं। विगत 13 वर्षों से डॉ. रमन सिंह के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार प्राणपण से विकास-कार्यों में जुटी है। दीनदयालजी के कथनानुसार प्रदेश के आमजन तक शासन की सुविधाओं का लाभ पहुँचे; यह स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। इस पुस्तक में दीनदयालजी के स्वप्न को पूरा करने में छत्तीसगढ़ सरकार कितना प्रभावी काम कर रही है; यही दर्शाया गया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय के स्वप्नों को साकार करने की सफलता की कहानी है यह पुस्तक।