कहानी कहने के तौर-तरीके कितने ही प्रकार के हैं। तमाम लेखकों की कहानियाँ जिस तरह एक ही तरह की नहीं होतीं, उसी तरह सबके लेखन की पद्धतियाँ अलग-अलग तरह की होती हैं। चूँकि सबके लेखन के तौर-तरीके अलग-अलग तरह के होते हैं, इसीलिए साहित्य का इतिहास भी इतनी विचित्रताओं से भरा है। लेखक जिस तरह अलग-अलग कोटि के होते हैं। पाठक भी उसी तरह अलग-अलग प्रकार के होते हैं। तरह-तरह के पाठकों की तरह-तरह की रुचियों के कारण ही साहित्य में इतनी विचित्रताएं मिलती हैं। यही वजह है कि साहित्य की दुनिया कभी पुरानी नहीं पड़ती