あらすじ
प्रस्तुत अध्याय में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना तथा भारत में प्रवेश से लेकर बंगाल में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की गतिविधियाँ, अठारहवीं शताब्दी में बंगाल की स्थिति, चुंगी को लेकर बंगाल के सूबेदारों से विवादए अलीवर्दीखाँ का शासन, कम्पनी के व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि, सिराजुद्दौला का अंग्रेजों से संघर्ष, सिराजुद्दौला तथा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के बीच झगड़े के कारण, नवाब द्वारा ईस्ट इण्डिया कम्पनी के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही, क्लाइव की नियुक्ति, कालकोठरी (ब्लैक होल) की घटना, क्लाइव की नियुक्ति (1757-1760 ई.), कलकत्ता की पराजय, अलीनगर की सन्धि (1757 ई.), प्लासी का युद्ध (1757 ई.), सिराजुद्दौला के विरुद्ध षड्यंत्र, मीर जाफर तथा उसके साथियों की गद्दारी, प्लासी के युद्ध का महत्त्व, मीर जाफर और अंग्रेज, अलीगौहर का आक्रमण, डचों पर आक्रमण (बेदरा का युद्ध), बंगाल में प्रशासनिक अव्यवस्था, मीर जाफर को हटाया जाना, मीर कासिम, मीर कासिम की समस्याएँ, समस्याओं के निराकरण के प्रयास, अंग्रेजों के साथ झगड़ा, बक्सर का युद्ध (1764 ई.) मीर कासिम की पराजय, मीर जाफर को पुनः नवाबी, बंगाल में अराजकता, शुजाउद्दौला की गद्दारी, शुजाउद्दौला तथा मीर कासिम की पराजय, बक्सर युद्ध का महत्त्व, क्लाइव की दूसरी गवर्नरी (जून 1765 से जनवरी 1767 तक), इलाहाबाद की संधि का मूल्यांकन, बंगाल में द्वैध शासन की स्थापना, द्वैध शासन प्रणाली की स्थापना के कारण एवं परिणाम, रॉबर्ट क्लाइव की सफलताओं एवं कार्यों का मूल्यांकन, वेरेलस्ट तथा कार्टियर, वारेन हेस्टिंग्ज की नियुक्ति तक का इतिहास दिया गया है।