あらすじ
संग्रह की ये कहानियों मेरे इन द्वीपों में 45 वर्षों के निवास के अनुभव के आधार पर लिखी गई हैं जो जीवंतता और यथार्थ की भूमि पर खरी उतरती है। मैंने यहां के जन जीवन को बहुत ही करीब से देखा, अनुभव किया, जीया और भोगा है। संकलन की 16 कहानियों का कथानक, कथ्य दृश्य पात्र चरित्र और घटनाक्रम में ये अनोखे द्वीप ही रहे है। बंगाल की खाड़ी में स्थित ये द्वीप अपनी सुषमा, सुंदरता, नैसर्गिक सौन्दर्य और सुरम्यता में अनूठे हैं। पाषाणयुगीन आदिवासी यहाँ हजारों वर्षों से निवास करते आए है, जो यहां के मूल निवासी है। इसके अतिरिक्त भारत के कोने-कोने से लोग आकर यहां बसे हैं, जिनमें भाषा, संस्कृति, धर्म, रंग रूप में विभिन्नता होते हुए भी आंतरिक एकरूपता देखने को मिलती है इसीलिए इसे मिनी इण्डिया' कहते है। ये कहानियों आपको व्यक्ति के मनोवेगों-राग-द्वेष, विश्वास, अन्तर्द्वन्द, क्रोध, अवसाद, षडयंत्र, कुटिलता, स्वार्थ, संघर्ष प्रेम-प्रीत, उत्साह जोश, सौहार्द्र, संवेदना, सदवा विधवा, बांझ, दलित, सवर्ण, साक्षरता, सहकारिता, लाल फिताशाही, विवाह, तलाक, प्रशासनिक अव्यवस्थाऔर तंत्र मंत्र से साक्षात्कार कराएंगी। निकोबारी कहानी 'उपहार' जहां आदिवासियों के जीवन और संस्कृति से परिचित कराती है, वहीं इनमें कूट-कूट कर भरी हुई देशभक्ति काभी एहसास कराती है। पाषाणयुगीन आदिवासी जारवा पर आधारित एन्मे कहानी जारवाओं के हृदय परिवर्तन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है। दिव्या कहानी में आधुनिक समाज की कुटिलता और स्वार्थपरता का जीता जागता उदाहरण है। सेटलर कहानी में प्रशासनिक अव्यवस्था एवं युवाओं में नशे की लत को देबनाथ के पूरे परिवार को लील देता है। रिश्तों की डोर कहानी में रजिया अपने पारिवारिक दायित्व को निभाने के लिए अपने भविष्य हो ही दांव पर लगा देती है, और जीवन भर क्वारी ही रहती है। 'कौमार्य' कहानी लाल फिताशाही पर चोट करती है तो राजिया में निरक्षरता के शाप को परास्त कर साक्षरता की ज्योति जलाई गई है। 'मझधार' में छः दशक पहले अण्डमान की नौकरी में आने वाली परेशानियों और कष्टों का विवरण है। त्रिशंकु के मलयाली पात्र अण्डमान में नौकरी करते हुए न घर के रहते है न घाट के। 'दुलारी' कहानी में ग्रामीण शादी शुदा शिक्षित व्यक्ति शहर में आकर कुंवारा बन शिक्षित महिला से प्रेम-विवाह का षड्यंत्र रचता है तो कैसे उसे मुंह की खानी पड़ती है। दलित वर्ग की सुंदर स्त्रियों पर उच्च वर्ग की कुटिल दृष्टि का चित्रण बनजारन' कहानी में हुआ है। 'लावारिश' कहानी में पार्वती सदवा होते हुए भी विधवा जीवन जीते हुए अंत में पति की कुटिल चालों का शिकार होकर अस्पताल में लावारिश जीवन जीने के लिए मजबूर होती है। प्रेतात्मा, तंत्र मंत्र झाड-फूंक की घटना पर आधारित कहनी है। समाज ऐसी कहानियों पर जल्दी विश्वास नहीं करता, लेकिन इस सच्ची घटना क्रम का लेखक स्वयं गवाह है। मछुवारिन कहानी में एक मछुवारिन के संघर्ष की अनवरत कथा है। परिवर्तन कहानी नशे पर बोट करती हुई उस दलदल से वकील साहब को निकाल लाती है। मृगतृष्णा कहानी में सौतेली मां अंत तक फुदकनी का पीछा नहीं छोड़ता और वह अंधकार के गर्त में चली जाती है।