あらすじ
हरफनमौला साहित्य लेखक भारत भूषण डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति अपनी 50वीं कृति- "स्पन्दन" के प्रकाशन पश्चात गोल्डन राइटर्स की सूची में दर्ज हो गए हैं। यह एक बहु आयामी काव्य संकलन है। 'अनन्त आभार' शीर्षक रचना से शुरू हुआ इस काव्य संग्रह का सफर 'अन्त में' शीर्षक रचना तक जाता है। इस बीच जहॉं 'हौसले का इम्तहान' है तो 'ऐ मेरे बचपन सुन' में बचपन की यादें भी हैं। कहीं पर 'कोशिश' के रंग में सने 'जीत की कीमत' को स्वर दिया गया है तो कहीं पर 'ये कैसा शोषण?' के माध्यम से समाज को आईना भी दिखलाया गया है। एक ओर प्रिय और प्रकृति के प्रति अटूट प्रेम है तो दूसरी ओर गॉंव की पगडण्डियों पर चलकर उन तक पहुँचने वाली यादें भी है। कहीं पर कृषक और नारी की तड़पती वेदनाओं की आवाज है तो कहीं 'चंदा मामा के देश में' बालपन का मधुरस भी है। 'अपराजित पाया मैंने' में शौर्य और संकल्प की परछाई है तो 'आज का बिलासपुर' जैसी रचना में परिवर्तनशीलता की झाँकी भी दृष्टिगोचर होती है। इसप्रकार "स्पन्दन" में संकलित रचनाएँ रोजमर्रा के जीवन में घटित घटनाओं से ही प्रेरित हैं। इसमें संकलित कविताएँ पाठकों एवं विद्यार्थियों को नवीन प्रेरणा से अनुप्राणित करती हैं।