あらすじ
मेरी कहानियों का पहला संग्रह ‘संकल्प अपना–अपना’ आप सभी पाठकों की समीक्षा के लिए प्रस्तुत है। इसमें ली गई हर कहानी अपने-आप में विशेष है। हर कहानी का अपना एक वजूद है और उसके पात्रों को अपने वज़ूद की तलाश है। कुछ सुख-दुख से भरी, कुछ आनंद की तो कुछ आशा-निराशा के बीच झूलती, घूमती हैं, कभी विरोधी स्वर है तो कभी दोस्त–सी। कहीं वे परत दर परत सच्चाई को उधेड़ती हैं तो कहीं उधड़े रिश्तों को रफू भी करती दिखाई देती हैं। जहाँ ‘प्यार और धोखा’ एक दोस्त के धोखे की कहानी को बताता है तो वहीं पर लोगों के अंदर मानवता की कमी होती जा रही है यह ‘बुढ़िया माँ’ कहानी बताती है। कहीं अनोखा रिश्ता पनप जाता है तो कहीं वैदेही जैसे पढ़ी-लिखी लड़कियाँ भी अपने ससुराल में आकर प्यार का एक बोल ना पाकर परेशान रहती हैं, तिरस्कार सहती हैं। कहीं दुनिया की सच्चाई के बीच अपने आत्म सम्मान की रक्षा करते, जीवन को जीते गरीब लड़कियों की कहानी है तो कहीं किसी की मजबूरी का फायदा उठाने वाले लोगों की लोलुप गिद्ध दृष्टि की सच्चाई भी है। चाहे गाँव हो या शहर, अंतर सिर्फ जगह का है, मानसिकता सब जगह की एक ही है। पुरुष महिलाओं को दबाना चाहते हैं। कहीं बच्चों की इच्छाओं को अपनी महत्वाकांक्षा की बलि चढ़ा देने वाले भी हैं, तो कहीं साधना के दीप जलाने वाले लोग भी हैं। कहीं माँ का प्यारा रूप है तो कहीं स्वदेश प्रेम को दर्शाती कहानी है। असल में हर कहानियों के अपने-अपने दायरे हैं और अपना-अपना संकल्प है। हमारी जिंदगी के विविध आयामों को, उनकी असलियत को दर्शाती कुछ कहानियाँ मैंने अपने उस पहले संकलन सें संकलित की हैं। आशा है हर एक कहानी अपने उद्देश्य में सफल होगी और पाठकों का भरपूर आशीर्वाद पाने में सफल होगी।