जब कोई निर्णायक परिणाम न निकल पाया, तो स्मृति और स्वप्न दोनों ने मिलकर आपको चुना है। मेरा काम तो बस यह सन्देश आप तक पहुँचाना था। सो मैंने पहुँचा दिया। ‘यादों के सौदागर’ में आप स्मृति और स्वप्न दोनों से दो-चार होंगे। अब ‘स्वप्न’ और ‘स्मृति’ की और ‘यादों के सौदागर’ की गति या दुर्गति की ज़िम्मेदारी से मैं अपना पल्ला झाड़ता हूँ और इसे आपकी ज़िम्मेदारी में सौंपता हूँ। (किताब की भूमिका से)