あらすじ
मुझे ये हमेशा से ही प्रतीत होता है के, हर विचार को, हर भावना को व्यक्त करने का एक सही माध्यम होना जरूरी है। कुछ विचारों को रंगों की मदद से कै नवास पर अकृत करना ही उचित होता है। कुछ भावनाएँ परछाइयों के साथ व्यक्त होना चाहती हैं, उन्हें तीसरे आयाम की ज़रूरत होती है अस्तित्व में आने के लिए और उनका जन्म शिल्पकला के द्वार उचित लगता है..इसी तरह कु छ भावनाएँ, कुछ संवेदनाएं, के वल शब्दों के साथ व्यक्त होने के लिए बनी होती हैं और इनका सही माध्यम कविता, शेर, नज़्म या मौसिकी ऐसा मुझे लगता है। इस किताब में मैंने ऐसी ही भावनाओं को अमूर्त रूप से व्यक्त करने का प्रयास किया है। ‘तैरती..डूबती..लकीरें मेरी’ — अमृत रूपी कविताओं की शृंखला है जो जीवन के अनेक अनुभवों को कोई चित्र रूपी कविता में साकार करती है। 'सब्र' जैसे भाव को आशा और साकारात्मक रूप देकर रचा गया है। 'फितरत' ये रचना मेरी, जीवन के सफर के दौरन, रास्तों की प्रकृति को व्यक्त करती है तो 'बारिश' जैसी रचना, प्रेम और विरह को रंगों की उपमा से अस्तित्व में आती है। मेरी कविताएँ, नज़्में, रचनाएँ उन जज़्बातों के इज़हार-ए-बयान हैं जो हम सभी अपनी ज़िंदगी में महसूस करते हैं। उम्मीद है कि मेरे शब्द पाठकों से संवाद रचेंगे और उनके दिल तक पहुँच पायेंगे। — सुदीप देशपांडे



