“चाँद पर दाग” पुस्तक में कवयित्री के गहन संवेदनाओ एवं एहसासों से रूबरू कराती है प्रेम बिषय पर लिखी कविताएँ प्रयेसी की तड़प, टीस, वेदना, ख़ुशी एवं कशमकश को ख़ूबसूरती से बयाँ करती है I कवयित्री की पीड़ा मीरा एवं महादेवी वर्मा की याद दिला देती है I अन्य बिषय जैसे सामाजिक बिसमताए, भ्रूण हत्या, नारी अधिकार, बर्द्धजनो एवं समाज की भाव शून्यता आदि का सुन्दर व सटीकता के साथ किया गया वर्णन उनके लिखने की दक्षता को बताता है I संकलन की अन्य कविताएँ जैसे रंगीन बचपन, मस्ती में चूर, बचपन की मीठी यादें यौवन की मस्ती एवं रोमांस की शब्दांकित का सरल व सहज प्रयोग ऊनकी उत्तम रचना को और उत्कृष्ठ बनाती है I