प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक उन सभी विशेषताओं को ध्यान में रखकर लिखे गए हैं, जो नुक्कड़ नाटकों के लिए अनिवार्य हैं। इनमें सम्मिलित सभी नाटक ऐसे हैं, जिन्हें सुव्यवस्थित मंच के बिना भी सीधे जनता के साथ जोड़ा जा सकता है। अभाव, महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ती हुई जनसंख्या, प्रशासनिक एवं राजनीतिक भ्रष्टाचार, प्रदूषण आदि कितनी ही ऐसी समस्याएं हैं, जो सीधी जनजीवन से जुड़ी हुई हैं और नुक्कड़ नाटक एक ऐसी सशक्त विधा है, जो जनसाधारण को गहराई से और सीधे-सीधे अपने साथ जोड़ सकती है। ये नुक्कड़ नाटक अपने उद्देश्य की पूर्ति सफलतापूर्वक करेंगे।