ये कहानी है एक राजा की, उसकी रानी की और उस रानी और उसके प्रेमी की। अपने कर्मों और प्यार से बंधे ये तीन कैसे एक युद्ध का कारण बने और उस युद्ध ने उनके जीवन को ऐसा बदला कि 400 सालों तक ये एक श्राप के तले जले। इनको मुक्त कराने इन के श्राप से स्वयं देवी-देवता ने लिया अवतार। दो सच्चे प्रेमी जले जुदाई में 400 सालों तक जैसे जले थे राधाकृष्ण 100 सालों तक। जुदाई की पीड़ा है भारी, ये समझे वही जो सच्चा इश्क करें। रिश्ते-नाते और दायित्व के तले कैसे इंसान भटक गया है और अंधकार की राह पर चल पड़ा है ये सार हमें इस कहानी से मिलता है।
ISBN: 9789393269768ASIN: 9393269769
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