あらすじ
शीला राय शर्मा की इक्कीस कहानियों का संग्रह ‘खिड़की’ उनका पहला कहानी-संग्रह है। हिंदी कथा-लेखन की पद्धति प्रेमचंद, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, इलाचंद्र जोशी, जैनेंद्र कुमार आदि से होते हुए इक्कीसवीं शताब्दी के सामुदायिक जीवन की सूक्ष्मता, मनोवैज्ञानिकता और विलक्षणता तक पहुँच गई। इस पूरे दौर के रचनाकारों की कई पीढ़ियों ने हिंदी कथा-क्रम को बड़े कौशल से भव्य बनाया; हिंदी कथा-साहित्य ने कथ्य-शिल्प-संरचना के कई मुकाम तय किए। तकनीक और विमर्शों की कई पद्धतियाँ अपनाईं। सामुदायिक जीवन के चरित्र और आधुनिकता के प्रभाव में सृजन के विलक्षण कौशल विकसित हुए, पर शीला राय शर्मा इन सभी अंतःक्रियाओं से लगभग अछूती रहीं। कथा-सृजन की रणनीतियों से उनका कभी कोई लेना-देना नहीं रहा। उन्हें इस बात का कोई गुमान भी नहीं कि वे अपनी कहानियों से दुनिया को कोई अलौकिक मार्ग दिखा देंगी। उनके पास गहन जीवन-दृष्टि है, सावधान समझ है, चैतन्य चित्त है, व्यक्ति, समाज और सामाजिक व्यवहार को देखने-समझने की ईमानदारी है, देखे हुए दृश्यों एवं अनुभूत तथ्यों की छवियाँ अंकित करने का विवेक है; कहन की भंगिमा है, इसलिए वे कहानी कहती हैं और इसलिए उनकी कहानियों में कथातत्त्व है, केवल कथातत्त्व। वे चूँकि कभी साहित्यिक अखाड़े में क्रियाशील नहीं रहीं, केवल पाठक ही बनी रहीं, इसलिए साहित्यिक आंदोलनों और विमर्शों से सदैव बाहर रहीं, पर साहित्यिक सरोकारों से परिचित रहीं, और उक्त उपस्करों के बूते कहानी लिखती रहीं। Khidki by Sheela Roy Sharma is a book that unfortunately lacks specific details about its content, genre, or purpose. The title, "Khidki," translates to "window" in Hindi, but its significance in the context of the book is unclear. Key Aspects of the Book "Khidki": Title Significance: The title "Khidki" (Window) may hold symbolic or thematic significance within the book's narrative. Authorship: Sheela Roy Sharma is the author, but the nature of her work within the book remains unspecified. Content Ambiguity: The listing does not provide specific details about the book's content, making it challenging to determine its genre or subject matter. While the author's name is provided, additional biographical information about Sheela Roy Sharma is not available in the listing.