あらすじ
जिन्दगी की कड़वी सच्चाई से हर कोई व्यथित है। ख्वाहिशों के लिए भागे जा रहे लोग। इन्सानियत दाँव पर, अपनेपन को तलाशते हर गली नुक्कड़। अकेलापन झेलता हर इंसान इक पल के सुकून की तलाश में जाने क्या-क्या कर गुजरता है, वहीं कुदरत इंसान को अपनाती है पर उसी कुदरत को इंसान खराब करे, हसरतों का मेला सजा है, हर पल बनती-बिगड़ती दुनिया में सबको चलाती हसरतें। इन शब्दों में आप खुद को ढूँढ पाओगे। सोचोगे, झुंझलाओगे, व्यथित होगे, मुस्कुराओगे। अपनी हसरतों को सोच उन्हें पूरा करने की जुगत लगाओगे।
ISBN: 9789363705050ASIN: 9363705056