あらすじ
वर्ष 2021 में दुनिया एक अदृश्य दुश्मन से जूझ रही थी, COVID-19 ने प्रत्येक परिवार को किसी न किसी रूप में प्रभावित किया था । अस्पताल मरीजों से भरे हुए थे, डर ने लोगों के दिलों में घर कर लिया था,और जिंदगियाँ बिना किसी चेतावनी के ख़त्म हो रही थी । ऐसे समय में, मैं भी इस वायरस से लड़ रहा था सिर्फ़ सांसों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जिन्दगी के लिएयह किताब न केवल मेरे, बल्कि मेरी पत्नी, मेरे बच्चों, मेरे परिवार और उन सभी लोगों के संघर्ष की कहानी है,जिन्होंने इस कठिन समय में मेरा साथ दिया था । यह कहानी है असम्भव परिस्थितियों में भी संघर्ष करने की, निराशा में भी हिम्मत दिखाने की, और अन्धेरे पलों में उम्मीद ढूंढ़ने की। मेरी यादों में एक पल ऐसा है जो हमेशा के लिए अंकित हो गया है। यह वह पल था जब मेरी पत्नी रोशनी एक वरिष्ठ डॉक्टर के सामने मेरे जीवन के लिए प्रार्थना करती हुई खड़ी थी । मैं २5 दिन तक अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती रहने के बावजूद भी अस्वस्थ था, इस समय तक मैं लगभग टूट चुका था,मैं प्रत्येक साँस के लिए संघर्ष कर रहा था,और अस्पताल कोविड के गम्भीर मरीजों से भरा हुआ था। डॉक्टर, जो पहले से ही तनाव और थकान से भरे हुए थे, ने गुस्से और निराशा में कहा "तुम क्या सोच रही हो? तुम्हारा पति ज़िंदा बच जाएगा,नहीं बचेगा ! उसे यहाँ से ले जाओ। बार-बार हम पर दबाव क्यों डाल रही हो?" रोशनी ने स्वयं को सम्भालते हुए कहा, "सर, हमने किसी से कुछ नहीं कहा है । मेरे पति की हालत की वजह से ही लोग अस्पताल मे फोन कर रहे होंगे । इसमें हमारी कोई गलती नहीं है ।" उसके बाद डॉक्टर ने कड़े स्वर में जवाब दिया,"तुम्हारा पति बचने वाला नहीं है। इसे यहाँ से ले जाओ।" ये शब्द, कठोर और निराशाजनक थे,जो उनकी आत्मा को छलनी कर गए। फिर भी, रोशनी ने हार नहीं मानी। उसने अपनी निराशा को दृढ़ संकल्प में बदल दिया। हार मानने के बजाय, वह मेरी जिन्दगी के लिए लड़ती रही,ऑक्सीजन का इंतजाम किया, दूसरे डॉक्टरों की मदद ली, और हर पल मेरे जीवन के लिए सच्ची पत्नी का कर्तव्य निभाते हुए ईश्वर से प्रार्थना करती रही। यह उनकी अटूट इच्छाशक्ति, मेरे परिवार के बलिदान और कुछ दयालु डॉक्टरों की विशेषज्ञता थी, जिन्होंने मुझे बचाया। तमाम बाधाओं के बावजूद, मैं इस लड़ाई में विजयी रहा। यह किताब उन सभी लोगों को समर्पित है, जो जीवन में किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं । चाहे वह बीमारी हो, विपरीत परिस्थितियाँ हों, या व्यक्तिगत चुनौतियाँ सफलता पाने के लिए दृढ़ता, संघर्ष, और स्वयं पर विश्वास की आवश्यकता होती है । मेरी कहानी इस बात की याद दिलाती है कि चाहे स्थिति कितनी भी विकट और असम्भव क्यों न लगती हो, हमेशा आगे बढ़ने का रास्ता होता है । मेरा सफ़र निराशा से भरा हुआ था, लेकिन इसने मुझे दया, साहस और इस सच्चाई से अवगत कराया कि जब प्यार और उम्मीद हमारा साथ देते है, तो मानव की आत्मा कभी हार नहीं मानती। वह अजेय रहती हैं।जीवन और मृत्यु का संवाद कोविड-19 से लड़ाई के दौरान कई ऐसे क्षण आए, जिन्होंने न केवल मेरी शारीरिक क्षमता को, बल्कि मेरे परिवार की मानसिक और भावनात्मक शक्ति की भी परीक्षा ली । डॉक्टर और मेरी पत्नी के बीच हुआ वह संवाद, जिसे मैंने ऊपर साझा किया, उन पलों का सबसे कठोर उदाहरण है। जब रोशनी डॉक्टर से बात करके मेरे अस्पताल के कमरे में लौटी, उसके चेहरे पर उनके शब्दों का बोझ साफ झलक रहा था । उसने मुझे देखा, आँखों में आँसू थे, लेकिन उसने उन्हें गिरने नहीं दिया। "आप ठीक हो जाओगे।" उसने मजबूती से कहा । मैं उसकी आँखों में डर देख सकता था, लेकिन उसकी आवाज़ में दृढ़ता थी । मैंने बस अपना सिर हिलाया, यह जानते हुए कि मेरी जिन्दगी एक नाज़ुक धागे पर टिकी हुई है। बाहर जाकर रोशनी ने मेरे भाई मुकेश को फोन किया ।भैया, यहाँ के डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी है। हमें कोई और रास्ता ढूंढ़ना होगा।" मुकेश ने उसे भरोसा दिलाया, "आप चिन्ता मत करो । हम जो भी करना पड़ेगा, करेंगे। आप बस हिम्मत रखो।" उस पल के बाद से, मेरी पत्नी और मेरा परिवार मेरे लिए योद्धा बन गए थे। जब मैं ज़्यादातर समय अर्ध बेहोश स्थिति मे ही रहता था,तब रोशनी ने मेरे लिए लड़ाई लड़ी,भोजन की व्यवस्था करवाई ,दवाइयाँ जुटाईं, आवश्यक मेडिकल टेस्ट करवाए और हर पल मेरी जिन्दगी के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।यह किताब क्यों लिखी? यह किताब लिखने का निर्णय आसान नहीं था । उन निराशा,अनिश्चितता और दर्द से भरे पलों को फिर से जीना भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण था। लेकिन मुझे महसूस हुआ कि मेरी कहानी केवल मेरे बारे में ही नहीं यह उम्मीद, संघर्ष और प्यार की ताकत के बारे में भी है। मैंने यह किताब लिखी है: उन परिवारों के लिए, जिन्होंने महामारी के दौरान अपने प्रियजनों को खो दिया और जो सान्त्वना पाने के लिए जीवित रहने की कहानियाँ ढूंढ़ रहे हैं। उन योद्धाओं के लिए, जो अब भी किसी न किसी लड़ाई का सामना कर रहे हैं चाहे वह बीमारी हो, आर्थिक समस्या हो, या जीवन की अन्य चुनौतियाँ हों । उन प्रत्येक नायकों के लिए जीवनसाथी, भाई-बहन, बच्चे, और दोस्त जिनके बलिदान और समर्थन हमें ज़िंदा रखते हैं। इस किताब के माध्यम से, मैं पाठकों को यह याद दिलाना चाहता हूँ कि जीवन में सफलता का मतलब संघर्षों से बचना नहीं, बल्कि उनका डटकर सामना करना है । कोरोना से मेरी जीत सिर्फ़ मेरी नहीं थी यह एक साझा जीत थी, जो मेरी पत्नी की दृढ़ता, मेरे परिवार के अटूट समर्थन,मेरे बच्चों के द्वारा की निरंतर की गई प्रार्थना और कुछ शुभचिंतकों और कुछ अच्छे डॉक्टरों के समय पर हस्तक्षेप से सम्भव हो सकी।अनकहे नायकों के प्रति आभार यह किताब महामारी के उन सभी अनकहे नायकों के प्रति आभार भी है: वे स्वास्थ्यकर्मी जिन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। वे परिवार जिन्होंने अपने प्रियजनों के साथ खड़े रहकर उनका हौसला बढ़ाया । वे व्यक्ति जिन्होंने ऐसी ताकत पाई, जो उन्हें स्वयं भी नहीं पता थी। रोशनी का मेरे लिए संघर्ष मानव की आत्मा की ताकत का प्रतीक है। डॉक्टर की बातों के बावजूद, उसने एक चमत्कार की प्रत्याशा में मेरे लिए लड़ने का निर्णय किया, और उसकी इसी लड़ाई ने मुझे जीवित रहने का अवसर दिया। आशा का संदेश यदि आप यह किताब पढ़ रहे हैं, तो यह जान लें कि संघर्ष जीवन का हिस्सा है । चाहे वह एक घातक वायरस हो या कोई व्यक्तिगत चुनौती, इसे पार करने की कुंजी आपके नज़रिए, आपके आस-पास के समर्थन, और कभी हार न मानने के आपके दृढ़ संकल्प में छिपी हैजैसे-जैसे आप इस पुस्तक के पन्नों को पलटेंगे,आप मेरे जीवन के सबसे अन्धकारमय दिनों से गुज़रेंगे। लेकिन आप यह भी देखेंगे कि कैसे उम्मीद की किरणें मुझे इस अंधकार से प्रकाश में लेकर आईं। मुझे आशा है कि मेरी यह कहानी आपको, आपकी अपनी रोशनी खोजने के लिए प्रेरित करेगी, चाहे रास्ता कितना ही कठिन क्यों न हो।यह किताब यह याद दिलाने के लिए है: स्वयं पर विश्वास रखें, भले ही दूसरे आप पर संदेह करें। अपने आस-पास के प्यार और समर्थन को संजोएं। जीवन में कभी हार न मानें । मैंने कोरोना से अपनी लड़ाई जीती और इस किताब के माध्यम से, मैं चाहता हूँ कि आप भी अपनी लड़ाई जीतें, चाहे वह लड़ाई कोई भी हो । कृतज्ञता और उम्मीद के साथ, सोहन सिंह । " ।
