प्रयागराज (उ.प्र.) निवासी लेखनी के धनी विद्वान कवि डा. देवी प्रसाद कुँवर की लेखनी जहाँ एक ओर समाज को रौशनी देती दिखलाई देती है वहीं अपने अंतर्मन की व्यथा कथा कहती प्रतीत होती है जो वेदना संवेदना को झकझौरती हुई सीधे मस्तिष्क को सोचने पर विवश करती है ...