महान देशभक्त जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर अपने को मातृभूमि की सेवा में प्रस्तुत कर दिया। जिनके लिपिबद्ध लेखों और ग्रन्थों को पढ़कर देश के क्रांतिकारी प्रेरणा लेते हो,जिनकी पुस्तकों को प्रकाशित होने से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया हो,जो आजीवन अखण्ड भारत का स्वप्नद्रष्टा रहा हो,यह कहानी उस स्वातन्त्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की है।