あらすじ
ऐलान गली धरती का स्वर्ग कहलानेवाले कश्मीर की एक ऐसी गली - जहाँ दरिद्रता, अज्ञान और अशिक्षा से त्रस्त लोग बसे हुए हैं। ऐलान गली में अभावग्रस्त लोगों की संस्कृति और जीवन संघर्षों का ऐसा चित्र उभरता है जहाँ यह कल्पना सम्भव नहीं कि यह स्वर्ग कहे जानेवाले कश्मीर का ही कोई हिस्सा है। ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ एक ऐसा उपन्यास है जिसमें साम्प्रदायिक-सौहार्द्र, सामाजिक साहचर्य, सहिष्णुता और सहजीवन के आदर्शों के नए-नए बिम्ब उभरते हैं। चन्द्रकान्ता को इस उपन्यास से चर्चाओं का एक ऐसा आयाम मिला जिसकी तलाश प्रायः हर मसिजीवी को रहती है। ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ के अनवर मियाँ, दयाराम मास्टर, संसार चन्द आदि कुछ ऐसे पात्र हैं जिनके चरित्र में साम्प्रदायिक सौहार्द्र के गुण परिलक्षित होते हैं। इस उपन्यास का एक युवक अवतारा जब आजीविका की खोज में मुम्बई आता है तब उसे ‘ऐलान गली’ की वास्तविकता का अहसास होता है कि वहाँ के लोगों के हृदय में प्यार का समुद्र ऐसे कुलांचें भरता है जिसकी कल्पना ‘मुम्बई’ की चमक-दमक और सम्पन्नता में भी नहीं की जा सकती। आपसी सम्बन्धों की मर्मस्पर्शी कथा ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ ने ही चन्द्रकांता को औपन्यासिक परिवेश में पहचान दिलाई।