あらすじ
सीता से शुरू––– ‘सीता से शुरू–––’ महज कथा–प्रवाह ही नहीं है । इस विविध कथा–चित्र का एक छोर पौराणिक काल से बँधा हैय दूसरा, मातृसत्तात्मक परिवार से और अन्त में, वर्तमान समय के आधुनिक मूल्यबोध से जुड़ा है । कुल मिलाकर, औरत की ज़िन्दगी के आदि–मध्य–अन्त के पर्वों की अन्तर्कथा ! नवनीता देव सेन की हर कृति का प्रसाद गुण, सरस–गम्भीर स्थापन पाठकों को मुग्ध करता है । प्रस्तुत कथा–संग्रह, औरत के अन्तर्मन और जीवन का बयान है । ये औरताना कहानियाँ नहीं हैं, औरत की कहानियाँ हैं । लेखिका ने अखंड काल–क्रम में साँस लेती हुई औरत के अनन्त दु%ख, शाश्वत व्यक्तित्व और समकालीन जटिलताओं की राह पर उसकी अभियान–कथा को कलमबन्द किया है । लेखिका के शब्दांे मेंµसीता से शुरू की गई यात्रा, वर्तमान युग में, आधुनिक औरत को अपने ही कटघरे में ला खड़ा करती है । इस कथा का पहला पर्व हैµपौराणिकी और तीसरा पर्व हैµआधुनिकी ! लेकिन मध्यवर्ती पर्व मातृयार्की के इर्द–गिर्द बुना गया हैµयानी, मातृ ़ याकी त्र् माँ से याराना ! अपनी माँ के बारे में, हँसी–खुशी से झलमल, ऐसे उपाख्यान विरल हैं ! कल्पना और वास्तविकता के मणिकांचन संयोग से ये कहानियाँ, शाश्वत सत्य के अमृत–मन्त्र की साक्षी बन गई हैं ।