"युवा कवि संजीव त्यागी की कविताएं पढ़ीं। इस युवा कवि का मन न केवल लोकसंस्कृति और जीवन के मूल तक पहुँच कर उससे हमारा परिचय कराता है बल्कि इतिहास और समसामयिक जीवन के दृश्यों और सवालों को भी अपनी कविता में पिरोता है। प्रिय संजीव को मेरी शुभकामनाएं और आशीर्वाद ऐसे ही लोक का स्वर गुंजायमान रखिए। कलम की धार बनी रहे और माँ सरस्वती का आशीर्वाद भी आप पर बना रहे।" प्रख्यात अभिनेता अखिलेन्द्र मिश्र जी की यह उक्ति नए तेवर के युवा कवि संजीव कुमार त्यागी जी के लिए अक्षरशः सत्य है। उनकी पहली पुस्तक 'ए सरकार ! किसान हईं हम' (भोजपुरी कविता संग्रह) आपके समक्ष रखते हुए प्रसन्नता हो रही है।