あらすじ
कही ....अनकही सम्वेदना मेरे उन भाव का संग्रह है जो अव्यक्त रह गए, कह न पाए ।तो कलम का सहारा पा कर अक्षर बन कागज पर बिखर गए । उन बिखराव को इस किताब के माध्यम से एक कड़ी मे सजोने की कोशिश है इसमें मैने मन के उन भावों को शब्द देने की कोशिश की है जो आत्मा और मन ने साथ साथ अनुभव किये है।भाव वो जो मन को खुश करते है कभी दुखी भी करते है।इसमे माँ है बेटी है,बेटा है,पिता है भाई है,दोस्त है संगी है । इसमे खुशी है रंज है ,अधिकार है तो कर्तव्य भी है।फूल है तो कांटे भी है। अनन्त वर्षो से पूर्णता की प्रतिक्षा करती प्रतीक्षा भी शूल सी मन को चुभती पल प्रतिपल संम्पूर्णता के स्वागत को आतुर मन के इस रण मे कोलाहल सी करती……आशा
ISBN: 9789390675241ASIN: 9390675243