あらすじ
कुंभकरण सिंह, जिन्हें महाराणा कुंभा के नाम से जाना जाता है, मेवाड़ साम्राज्य के शासक थे। वे राजपूतों के सिसोदिया वंश से थे | उनके शासनकाल के दौरान मेवाड़ उत्तर भारत में सबसे शक्तिशाली राज्यों में से एक बन गया था उन्हें भारत में अपने समय का सबसे शक्तिशाली शासक माना जाता है। कुंभा मेवाड़ के राणा मोकल सिंह के पुत्र थे। वे मेवाड़ के 48वें राणा थे और वर्ष 1433 ई. में राणा मोकल सिंह के बाद मेवाड़ के शासक बने | जब कुंभा सिंहासन पर बैठे तो उन्हें संपूर्ण मेवाड़ विरासत में मिला, जिसमें चित्तौड़गढ़, कुंभलमेर, राजसमंद, मांडलगढ़, अजमेर, मंदसौर, ईंडर, बदनोर, जालौर, हाड़ौती, डूँगरपुर और बाँसवाड़ा शामिल थे। कुंभा ने अपने जीवन में 56 लड़ाइयाँ लड़ीं। उनकी विजय में जंगलदेश, सपादलपक्ष, मारवाड़, सारंगपुर, नरवर, हरवती, रणथंभौर, वीसलपुर, आबू, सिरोही, गागरोन और नागौर की मुसलिम सल्तनत पर आधिपत्य स्थापित करना प्रमुख थे | उन्होंने मांडलगढ़, मालवा और गुजरात के सुल्तानों को भी हराया | मेवाड़ की रक्षा करनेवाले 84 किलों में से 32 कुंभा द्वारा बनवाए गए थे | कुंभलगढ़ के किले का निर्माण महाराणा कुंभा ने करवाया था। यह राजस्थान का सबसे ऊँचा किला है। मालवा विजय के बाद महाराणा कुंभा ने चित्तौड़ में 121 फीट ऊँचा, नौ मंजिला विजय स्तंभ बनवाया | शौर्य, पराक्रम, साहस और अद्भुत जिजीविसा के प्रतीक महाराणा कुंभा की प्रेरक गौरवगाथा |