あらすじ
नेपथ्य से उद्घोषणा - बीमारी आखिर बीमारी होती है चाहें वह भौतिक शरीर में हो या किसी समाज मंे। प्रिय दर्शकांे यहाँ पर आप भारत माँ को हुयी संक्रमक बीमारी - भ्रष्टाचार, से पीड़ित देखेंगे, कराहती माँ की पीड़ा देखेंगे। पीड़ा से दुःखी माँ की छटपटाहट भी देखेंगे। हाँलाकि मैं यह जानता हूँ। इस सभागार मंे उपस्थित प्रत्येक आत्मा इस पीड़ा को सहन कर रही है। भारत माँ क्या सोंचती है हमें देखकर, यही दिखाने की कोशिश की है आपके इस अदने से लेखक विमल ने। भारत माँ की व्याकुलता में यदि आप अपने को रख सके तथा भ्रष्टाचारियों के खिलाफ नफरत व क्रोध उतार सके; साथ ही माँ के प्रति दर्द के कारण आंखो मंे नमी ला सके तो मैं समझूंगा मेरी कलम ने अपना कर्तव्य पूरा किया।
ISBN: 9789386163318ASIN: 9386163314