あらすじ
"कुछ कही, कुछ अनकही" केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि यह अनुभवों, भावनाओं और जीवन की सूक्ष्म संवेदनाओं का सजीव चित्रण है। इसमें संजोए गए हर शब्द पाठकों को उनके अपने जीवन से जोड़ते हैं—कभी स्नेह की गर्मी में, तो कभी स्मृतियों की टीस में। प्रवीण शर्मा की लेखनी सरल, आत्मीय और प्रभावशाली है, जो मन के भीतर छिपी कहानियों को उजागर करती है। यह संग्रह प्रेम, पीड़ा, रिश्तों, समाज और आत्ममंथन के विविध रंगों को बिखेरता है। यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए है जो कविता में अपने विचारों और भावनाओं की झलक ढूँढ़ते हैं, और जिनकी आत्मा शब्दों की गहराइयों में सुकून पाती है।
ISBN: 9789367277393ASIN: 9367277393
