あらすじ
वर्तमान काल खण्ड में हमारी ऊर्जावान युवाशक्ति की नियोजन प्रकृति वा कार्य प्रकृति के साथ ही जीवन की आपा धापी को देख कर यह ज़हन में आया कि युवा चेतना में स्वयं वा देश की संपन्नता तथा विकास के प्रति जितना समर्पण वा लालसा है, शायद उतनीं ही भारतीय संस्कृति वा विरासत को जानने, सहेजने में भी गहन रुचि है, परन्तु कार्यव्यस्तता वा समयाभाव के कारण भारतीय अध्यात्मिक ग्रन्थों का विस्तृत अध्ययन करना चाह कर भी उन्हें सहज संभव नहीं हो पा रहा है। बस इसी उहापोह की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए मन में विचार आया कि क्यूं न प्रमुख भारतीय प्राचीन ग्रंथों के गूढ़ भाव को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाए और युवाशक्ति की चेतना में भारत की प्राचीनकालीन सांस्कृतिक विविधता, उन्नत अध्यात्मिक ज्ञान की बृहदता वा महत्व को उनके समक्ष रखा जाय, ताकि हमारी युवाशक्ति विकास के साथ अप्रतिम भारतीय विरासत से रूबरू हो सके और भविष्य में भी इसकी निरंतरता, जीवंतता वा प्रासंगिकता को सहज रूप से सहेज कर अनवरत रख सके । इस पुस्तक में भारतीय प्राचीन ग्रंथ जैसे गीता, रामायण, महाभारत के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण रचनाओं, विषयों के भाव को संक्षेप में सहेज कर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है तथा अध्ययन में नीरसता, सूनापन ना रहे वा रोचक बनाए रखने के लिए कुछ स्व-रचित कविताओं, क्षणिकाओं को संकलित कर"एक नज़र में"[ At a glance ] प्रतुत करने का प्रयास किया गया है।