'कल्पना पुंज' - साझा संग्रह / kalpana punj - saajha sangrah
Dr.ManjuMishra'SwayamSiddha'Dr.RajraniArora'Vrinda'RanjitaArora
あらすじ
About the book : कल्पना पुंज 'स्वयंसिद्धा' और 'वृंदा' की सामंजस्य पूर्ण धारा को भावनाओं के पुल से पार उतारा गया है।सुख-दुःख, हर्ष -शोक, शांत-वीर, धर्म-नीति जैसे अमूल्य मिश्रित भावों की सुंदर अभिव्यक्ति 'कल्पना पुंज' साझा संग्रह के रूप में प्रस्तुत है। यह पुंज जीवन के धरातल पर सामाजिक संबंधों की वास्तविकता को भी बयां करता है। कहीं वाणी रूपी तलवार की धार है तो कहीं अपनों संग प्यार और श्रृंगार है।कहीं देश की आन ,बान और शान है तो कहीं लफ़्ज़ों में बयां दर्द की दास्तान है। छलकते हुए भावों के गहरे सागर में 'कल्पना पुंज' जैसे मोती का अमूल्य स्थान है। साहित्यिक काव्य कृतियों में भावों की अनुभूति प्रबल रहती है। कहना न होगा कि 'कल्पना पुंज' काव्य संग्रह में जीवन के विभिन्न उतार-चढ़ाव के साथ संघर्ष की जुबान को कल्पना के रंगों से सजाया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में अध्ययनशील परम्परा को अनवरत रखती हुई ये काव्य रचनाएँ अनुभवों की असीम बारीकियां लेकर उपस्थित हैं।जीवन के विभिन्न सुरों से सजे ये कल्पना गीत भाव प्रवण शब्दों के गंगा जल से स्निग्ध स्नान करवाकर हिंदी साहित्य के आंगन में सजाए गए हैं । कोमल भावनाओं से सजी 'कल्पना पुंज' रूपी लता को अनुभव के शब्दों का लिबास पहना कर साहित्यिक साधना की माला में एक सुरभित पुष्प पिरोया गया है। 'कल्पना पुंज' साझा संग्रह उन अनुभूतियों को संजोए है जो मानस पटल को न केवल उद्वेलित करती हैं अपितु हमें भावात्मक बल भी प्रदान करती हैं। सुख-दुःख की मिश्रित अभिव्यंजनाओं को प्रस्तुत करती हुई सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित करती हैं। अनुभूतियुक्त रचनाओं के सागर में रंजिता का अमृत तुल्य बून्द समान सहयोग दृष्टव्य है।सीमित शब्दों में 'गागर में सागर' जैसी अनुभूति करवाती काव्य रचनाएँ मन मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ती हैं।'कल्पना पुंज' स्वतः स्फूर्त काव्य पुंज बन गया है।