एकांकी नाटक गद्य की एक स्वतंत्र विधा है। नाटक वस्तु की सत्यता या वास्तविकता का दर्शन कराते चलता है। चूंकि नाटक में जब तक दर्शकों/पाठकों को रसानुभूति नहीं होती तब तक अभिनय की सफलता एवं कथानक की सार्थकता संभव नहीं हैं। इसलिये रंगकर्म को इंद्रधनुषी कला भी कहा जाता है। नाट्य कला का मानव सभ्यता व संस्कृति के विकास में सर्वाधिक योगदान है। इस एकांकी में आप विविध रसानुभूति से गुजरेंगे और आप इसे बार बार देखने-पढ़ने के लिए इच्छुक होंगे ऐसा मेरा विश्वास है।