あらすじ
जय शंकर मिश्र ने देश की शीर्ष सेवा में चुनौतीपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का कुशल निर्वहन किया है । व्यावसायिक शुष्कता एवं नीरसता को उन्होंने अपनी संवेदनशीलता पर कभी हावी नहीं होने दिया । गहन बौद्धिकता के साथ-साथ उन्होंने एक संवेदनशील मन भी पाया है । यही कारण है कि उनके हृदय में सरस काव्य रस की अंतर्धारा प्रवाहित होती रही है । प्रस्तुत काव्य संग्रह में संकलित कविताएँ घटनाओं, रिश्तों, अनुभूतियों पर कवि-मन की सहज प्रतिक्रियाएँ हैं । जो बात इन कविताओं को पढ़ते समय सर्वाधिक प्रभावित करती है, वह है शाश्वत मानव मूल्यों में अटूट आस्था और मनुष्य की रागात्मक वृत्तियों व प्रकृति के साथ उसके चिरंतन संबंधों की सहज, स्पष्ट तथा निर्भीक स्वीकारोक्ति ।
ISBN: 9788185826813ASIN: 8185826811