あらすじ
यहाँ प्रस्तुत कविताएं समाजिक व्यवस्थाओं पर आधारित है, यदि हम तटस्थ होकर सोचें तो क्या आजादी के इतने दिनों बाद भी क्या सही माइने में हमारी स्थिति में कोई सुधार हुआ है? आम जनता आज भी वही गरीबी,शोषण और भ्रस्टाचार से पीड़ित है। आज देश में जितना साकार बेलगाम हुई है, उससे कहीं ज्यादा यहाँ अफसरशाही बढ़ी है। आज हमें यह सोचने की आवश्यकता है कि आखिर क्यों आजादी के इतने दिनों के बाद भी परिस्थितियाँ जस-की-तस है। आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग अशिक्षित, और विकट परिस्थितियों में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। आज तक अनेकों देश के भाग्यविधाता बनें लेकिन देश का भाग्य क्यों नहीं बदल सका। अगर देश के भाग्य को बदलने की क्षमता किसी में न होती है तो क्यों स्वयं को भाग्यविधाता कहलवाते हैं। निःसंदेह हमारी संस्कृति प्राचीन और समृद्ध है लेकिन क्या वजह रही कि हमसे बहुत पीछे जिन देशों का उदय हुआ वो भी आज भारत को आंखे दिखाते रहता है, और हम कई मामलों में उन्हीं देशों पर आश्रित रहते हैं। इसका तो दो ही कारण हो सकता है या तो हममें अब वो शक्ति नहीं बची या तो हममे इच्छा-शक्ति की घोर कमी है। हम सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए काम कर रहे हैं। यही कारण है कि आज कोई भी अगर भारत के समृद्ध हों कि बात करता है तो लोग विभिन्न प्रकार के तर्क देकर उनका उपहास करने लगते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हमारे देश में हैं जो कि इन्हीं संस्कृति के बल पर टिकें है लेकिन यह भी सच है कि उनलोगों ने देश के सांकृति के हित के लिए कोई भी काम नहीं किया। अब राम नाम जपना, पराया माल अपना वाले सूत्र को अपना आदर्श बनाया हुआ है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो देश की आज ऐसी दुर्गति नहीं रहती।








































