あらすじ
आदि काल से हमारे मनीषियों एवं विद्वानों ने अपने अनुभव सूत्रों के रूप में प्रदान किये हैं ताकि भटकता हुआ मनुष्य इस सूत्र रूपी अनुभव को पढ़ कर सही दिशा को प्राप्त कर सके। समाज को दिशा देने वाले कुछ लोग मनीषियों, विद्वानों के प्रेरणादायक सूत्रों को दीवारों पर लिखवा देते हैं। मुझे एक बार सुशील शास्त्री औरंगाबाद के आवास पर जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ। उनके यहाँ चारो ओर दीवारों पर विद्वानों के प्रेरणादायक वाक्य लिखे हैं पढ़कर, जिसमें यह भी लिखा था 'परिश्रम सफलता की वह चाभी है, जो भाग्य के ताले खोलती है।' मैंने अपने जीवन में उतारा, आज भी 12 घन्टे परिश्रम करता हूँ। हमें देखकर जिन लोगों ने परिश्रम अपनाया है अपने जीवन में सफल हैं। इन विद्वानों के अनुभव सूत्र पढ़कर के चाहे पुस्तक में लिखे हों - चाहे दीवारों पर, अपने जीवन में सुधार लाया जा सकता है। तुलसी दास जी अपनी प्रियतमा के शब्दों को सुनकर परिवर्तित हुए और इतने बड़े कवि हुए कि उनकी रचनायें मानव समाज को युगों-युगों तक प्रेरणा देती रहेंगी। यह अनुभव सूत्र ही आपात स्थिति में जीवन को दिशा देते हैं। आज आवश्यकता है सार्वजनिक स्थल, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, बरात शाला स्कूल-कालेजों में विद्वानों के सूत्र लिखें हो ताकि इन्हें पढ़कर लोग एक सही दिशा प्राप्त कर सकें।