दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों की सेवा करते-करते गांधी जी को उनकी समस्याओं का अनुभव हुआ। तत्पश्चात् भारत लौटने के बाद उन्होंने गोखले जी के कहने पर संपूर्ण भारत का भ्रमण किया। अंततोगत्वा साबरमती के तट पर उन्होंने अपना आश्रम बनाया और आगे की गतिविधियां संचालित कीं। इनमें से एक थी नवजीवन पत्रिका! इसी पत्रिका के लिये साप्ताहिक अवधि में प्रकाशित होने वाले लेखों में उनकी आत्मकथा सबसे पहले छपी। यह आत्मकथा हमें इस तथ्य का आभास करवाती है कि क्यों महात्मा गांधी संभवतः इस संसार के अकेली राजनैतिक हस्ती हैं जिन्हे 'महात्मा' की उपाधि मिली है।<