यह अनिल चौधरी जी की पहली पुस्तक है जो वास्तव में इनके भावों और अनुभूतियों का संकलन है। इन्होंने प्रेम, रोष, अपेक्षा, उपेक्षा, आशा, ईश्वर, धर्म, जब जो और जैसा महसूस किया, कागज़ पर उतार दिया। कविता और मुक्तक के माध्यम से अनिल जी का अपने जीवन के पहलुओं को संकलित करने का प्रयास है ये पुस्तक। जीवन में उतार-चढ़ाव, अवसाद -प्रेरणा इत्यादि भावों को छूने का प्रयास है ये पुस्तक। इस पुस्तक को पढ़ते समय पाठक ये अवश्य महसूस करेंगे कि ये रचना जैसे उनके लिए ही लिखी गई है या उनके जीवन से ही सम्बंधित है, और वास्तव में यही इनकी पहली पुस्तक की सार्थकता होगी।