あらすじ
किताब मेरी जीवनसाथी:- तेरा मेरा रिश्ता जज्बात से जुड़ा है ये वो संगम है जो बिना मुलाकात के जुड़ा है। ये वो बंधन है जो तेरी ख़ुशी और मेरी चाहत के एहसास से जुड़ा है। ये रिश्ता मेरा ऐसा है जो कभी ना टूटने वाला रिश्ता बन गया। नौ रत्नों से बढ़कर किताब अनमोल रत्न है, जिसकी कोई कीमत नहीं होती। किताबों में होती है नई खोज किताबों से मिलती हमें नई सोच। किताबों से रिश्ता मेरा कुछ इस तरह का है जो मेरा जीवनसाथी है और मेरे जीवनसाथी का नाम है ' अनमोल रिश्ता ' मेरा रिश्ता जन्मों जन्मों तक साथ निभाने वाला रिश्ता है। ये मुझे हंसाती है तो खूब रुलाती भी है। मुझे हमेशा आगे बढ़ने का होंसला देती है। हर सुख दुख में मेरा साथ निभाती है। कभी ना टूटने का वादा है मेरा, कभी ना दूर जाने की हमने सौगंध है खाई। ऐसे कैसे तेरा साथ छोड़ दूं, जिसने मेरा हर पल साथ निभाया। जिसने जीवन में कुछ कर गुजने की चाहत पैदा की। किताबों को पढ़ना शौक ही नहीं ये मेरा जीवन का हिस्सा भी है जो एक नई उमंग लाती हैं। इतनी आसानी से ना छोडूंगी इस जन्म तेरा साथ। मैं भी एक किताब बन जाना चाहती हूं। जिसका जब दिल चाहे खोल कर पढ़ पाए। जिससे पढ़कर लोगों के बन्द रास्ते खोल दूं मैं। इस दुनियां की भीड़ में अकेला ख्वाब हूं मैं। जो समझ ना पाए मुझे उनके लिए बस ना समझ ही हूं मैं, जो समझ जाए उनके लिए खुली किताब हूं मैं।(डॉ.श्वेता सिंह,24.62021)



