あらすじ
ये कहानी एक ऐसी लड़की पे आधारित हैI जिस लड़की को हिंदुस्तान देश की भ्रषट समाज और लड़की की स्वर्थी परिवार ने तकलीफ तभी देना सुरुह कर दिया थाI जब वो माँ की कोख में थीI ये लड़की जन्म के बाद भाई के लिए जीती थीI जब जवान (16 वर्ष) हुई तो समाज के लिए जीती थीI जब 19 वर्ष की हुई तो पति के लिए जीती थीI जब 21 वर्ष की हुई की अपने बचे के लिए जीती थीI मतलब साफ है की, यह लड़की अपने जिन्दगी में, वो अपने जिन्दगी के हर मोर पर सिर्फ दूसरों के लिए जीती थीI ‘बच्पन से लेकर–बुढ़ापे तक’ यह लड़की जीना तो चाहती थी लेकिन समाज और परिवार के लोग उसे जीने नही देता था I सिर्फ उसे जिन्दा रखता था I यह लड़की जिन्दगी में कुछ करना चाहती थी, अपना नाम और पहचान वनाना चाहती थी, लेकिन भ्रष्ट समाज और उस लड़की की स्वर्थी परिवार उसे कुछ करने नही दियाI और ये भ्रषट समाज और स्वर्थी परिवार, ये साबित कर दिया की नारी जाती सिर्फ और सिर्फ समाज और समाज के मर्दों के जरूरत अनुसार इस्तेमाल के लिए होती हैI
