あらすじ
अभी अधूरापन है आँखों में (हिंदी कविता संग्रह | प्रेम, युवा मन और आत्ममंथन की कविताएँ) “अभी अधूरापन है आँखों में” एक समकालीन हिंदी कविता संग्रह है, जो एक युवा मन की गहराइयों में पनपते भावों, आकांक्षाओं, प्रतीक्षाओं और संभावनाओं का संवेदनशील संकलन है। यह पुस्तक उन अनुभवों को शब्द देती है, जो अधूरे प्रतीत होते हुए भी जीवन की निरंतरता और विस्तार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन जाते हैं। इस संग्रह में प्रेम कविताएँ, नज़्में, मुक्त छंद रचनाएँ और कुछ ग़ज़लें शामिल हैं, जो युवा मनोविज्ञान, आत्मसंघर्ष, स्वीकार्यता और बदलते सामाजिक अनुभवों को काव्य रूप में प्रस्तुत करती हैं। लेखक स्वयं युवा अवस्था से गुजरते हुए अपने भीतर के अधूरेपन को पन्नों पर उतारते हैं—ताकि पाठक भी अपने अनुभवों, प्रश्नों और भावनाओं को इन रचनाओं में पहचान सकें। जीवन संभावनाओं की एक विस्तृत भावभूमि है— और यह संग्रह उसी विस्तार की खोज है। लेखक परिचय- शिवांशु मिश्रा ‘बेनाम’, उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले से हैं, और अपनी पहली पुस्तक के माध्यम से पाठकों का उनके खयाली जीवन में तहे दिल से इस्तकबाल करते हैं। वे आशा करते हैं कि उनका यह प्रयास एक सकारात्मक और संवेदनशील साहित्यिक पहल के रूप में पाठकों तक पहुँचे।