あらすじ
कविता और गीत पुष्प गुच्छ के लिये दो शब्द कवि और गीतकार उमड़ते भाव की लहरों को अपनी कलम से कागज में लिख देता है। कवि हृदय सरल कोमल होता है। वह अपने आसपास जो देखते हुए अनुभव करता है, वही वह अपने मन के होंठों से बुदबुदाने लगता है और यही बोल कविता और गीत को जन्म देते हैं अर्थात कवि कविता और गीत के माध्यम से प्रेम, विरह, व्यंग्य, हास्य तथा रुद्र भावों को शब्दों की सहायता से समय और वातावरण (परिवेश) के अनुरूप अपने मन के भावों को परोसता है। इसी प्रकार कवि हृदय सुकुमार डे तथा उनके पिता हरिपद डे अहिन्दीभाषी होने के बावजूद हिन्दी भाषा में कविता और गीत समय तथा परिस्थिति के अनुसार अपनी लेखनी से श्रोताओं को भावविभोर करने का प्रयास करते हैं। ‘गीत गाता चल’ पुष्प गुच्छ में प्रेम रस, विरह रस, हास्य रस, देश भक्ति से प्रेरित कविता तथा गीत के माध्यम से अपनी भावना को परोसने की कोशिश की है। यह पाठकों और श्रोताओं पर ही निर्भर करता है कि वे कितना स्वीकार करते हैं, फिर भी हम दोनों पिता और पुत्र आशा यही करते हैं कि पाठक और श्रोतागण निश्चय ही प्रसन्न होकर शुभेच्छा भी व्यक्त अवश्य ही करेंगे।