एक साधारण-सा फिल्म निर्देशक अचानक अपने आपको अजीब-सी विषम परिस्थितियों में पाता है। उसे लगता है जैसे अब सब कुछ खत्म, लेकिन नहीं ये तो सिर्फ़ एक शुरूआत थी और जीवन के इस सबसे मुश्किल वक्त में उसके पास आता है, द्वापर का महायोद्धा और उसकी ज़िंदगी बदल जाती है। उसका सामना ऐसे अद्भुत रहस्यों से होता है, जिनके सामने उसे उसकी वर्तमान दुनिया बहुत छोटी लगने लगती है, तभी उसे उसके जीवन का उद्देश्य पता लगता है और वह स्वतः ही हिस्सा बन जाता है उस महाभीषण युद्ध का जिसे लड़ रहा था वसुदेव कृष्ण का प्रिय शिष्य व कालजयी योद्धा सात्यकि।इस महागाथा में आपका स्वागत है, जहाँ भूतकाल और वर्तमान एक साथ मिलकर भविष्य को ठीक करने की ओर बढ़ रहे हैं। स्वागत है आपका एक ऐसी यात्रा में जिसे शुरू कर आपका पीछे लौटना लगभग नामुमकिन है “ क्योंकि आप यात्रा कर रहे हैं उसके साथ जो है, ज्ञात संघ का वंशज ”।
ISBN: 9789360458010ASIN: 9360458015
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