あらすじ
"रिश्ता तेरा मेरा” न्याय के क्षेत्र में कार्य करने वाले दो युवा न्यायाधीशों—पुष्पा और करीम—की प्रेम, संघर्ष और मानवीय मूल्यों से जुड़ी कहानी है। इस उपन्यास को लिखने की प्रेरणा मुझे समाज में व्याप्त सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक विसंगतियों तथा विभेदों को गहराई से देखने और समझने से मिली। साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है। इसी विश्वास के साथ इस उपन्यास में मैंने उन परिस्थितियों और चुनौतियों का चित्रण किया है जो दो मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले युवाओं के जीवन में सामने आती हैं, जब वे न्याय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ अपने संबंध और मानवीय मूल्यों को भी बचाए रखने का प्रयास करते हैं। कॉलेज जीवन में जन्मा यह संबंध समाज के कठोर नियमों, परंपराओं और पूर्वाग्रहों से टकराता है, लेकिन प्रेम, साहस और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें हर चुनौती का सामना करने की शक्ति देती है। यदि आप सामाजिक यथार्थ, प्रेम और संघर्ष से जुड़ी कहानियों में रुचि रखते हैं, तो यह उपन्यास अवश्य पढ़ें।