あらすじ
About the Author : Flap 1 मेघदूत की कथावस्तु कवि- कल्पित है। कवि ने विरही यक्ष के द्वारा अल्कापुरी के मार्ग और अल्का के वर्णन द्वारा प्रकृति चित्रण का सुन्दर अवलोकन करवाया है। इसका वर्णन दो भागों में हैपूर्वमेघ में मार्ग का वर्णन है। उत्तरमेघ में अलका की समृद्धि व यक्षिणी के सौन्दर्य विरह दशा का वर्णन है। अंत के कुछ पदों में यक्ष का सन्देश दर्शाया गया है। अपने किसी कर्तव्य में घमंड के कारण स्वामी के शाप से ग्रस्त कोई यक्ष अपनी महिमा को धोकर रामगिरि के आश्रमों में निर्वासन के दिन बिता रहा थालगभग आठ मास का समय बीतने तक, यक्ष अपनी प्रिया के वियोग के कारण कृश-काय हो गया था। उसका समय बहुत कठिनाई से बीत रहा था। शेष भाग अगले फ्लैप पर.. Flap 2 तत्पश्चात् आषाढ़ के पहले दिन यक्ष ने अपने सामने पर्वत- शिखर को आलिंगन करते हुए मेघ को देखा। तभी वह अपनी प्राण-ि उठा और उस मेघ के द्वारा अपनी प्रिया को सन्देश भेजकर आश्वस्त करने का सफल प्रयास किया।