あらすじ
‘अपना-अपना आसमान’ की कहावनयों की विवशिता को पररभावर्त करनेिाला एक और आधार है, जो विशेर् महत्व रखता है और िह यह वक उनमें से अवधकांश वशक्षा और वशक्षण के क्षेत्र से सम्बंवधत जीिन की थथवतयों से प्रेररत हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो कम से कम वहंदी सावहत्य में एकदम अनछुआ और उपेवक्षत है। श्रीमती रतन रश्मि रैना ने शायद पहली बार इस क्षेत्र को अपनी रचनात्मकता का एक प्रेरणास्रोत बनाकर सावहत्य को उन प्रवियाओं और शश्मियों के साथ जोड़ने का प्रयत्न वकया है, वजनका उद्देश्य मनुष्य के व्यश्मित्व का सम्पूणि विकास है। संग्रह की पहली ही कहानी ‘हौसलों की उड़ान’ में नील और मनु के माध्यम से वशक्षक और छात्र के पारस्पररक संबंधों के अव्याेय मनोविज्ञान की सूताओं को उजागर वकया है। कहानी में मनुष्य के तन नहीं मन-हौसले के महत्व को पहचनाने पर जोर है। ‘प्यार का दीप’, ‘सकारात्मक सोच’, ‘अपराजेय’, ‘मुाँहबोला भाई’, ‘िह रहनेिाली महलों की’, ‘ताजी हिा का झोंका’ आवद इस िगि के अंतगित आनेिाली अ कहावनयााँ और लघुकथाएाँ हैं।