あらすじ
वो छह क मंडली थी वभ जगह पर कायर्रत अपने अपने वसाय म लेकन कोवड19 क आपदा क वजह से लगे लॉकडाउन ने उ मौका दया अपने पैतृक गावँ के शांत और कोरोना से सुरत वातावरण म इठा होने का। लेकन इस बार इनका इंतजार ‘वो’ कर रही थी ‘वो’ जो बारह वषर् पहले भी आई थी लेकन कैद कर दी गई थी गहन अंधकार म। ‘वो’ जो बारह वष क कैद म अपनी लगन से चक्र दर चक्र पार करके प्रेतयोन के आखरी चक्र म आ चुक थी और बेहसाब शशाली हो चुक थी। ‘वो’ जो अब उस कैद से आजाद हो गई थी और इस बार उसे रोक पाना मुल ही नही नामुमकन था। ‘वो’ जो चुरा लेना चाहती थी समय के चक्र म से थोड़ा सा वतर्मान, ोक उसके पास अतीत तो था, भव भी था क तु वतर्मान नही था। ‘वो ‘ जो तलाश म थी उसक जसके लए वो वतर्मान चुराना चाहती थी और तलाश उसक भी थी जसक बेरहमी ने उसके वतर्मान को भूत म बदल दया था। ‘वो’ जो नकल चुक थी अपनी आखरी मंजल क तरफ। और वो बूढा संत जो स को उपल हो चुका था और जो सम था इस बला को रोक पाने म वो सफर् साी भाव से घटत घटनाओं को देख रहा था।
