मध्यमवर्गीय और उच्चवर्गीय परिवार की असमानता की ऐसी तल्ख हकीकत, जिससे हमारे समाज में अक्सर लोगों का वास्ता पड़ता है। इस हकीकत को औपन्यासिक किरदारों के साथ सामाजिक ताना-बाना देकर उपन्यास के रूप में सामने लाया गया है। यह सामाजिक उपन्यास सामाजिक ज़िन्दगी का सच्चा आईना है।