あらすじ
कॉन्सॅन्ट्रैशन कैम्प में तीन घंटे हर जन्म लेनेवाले की मृत्यु निश्चित है । मृत्यु भयावह नहीं है, भयावह है उसकी कल्पना । इसीलिए शायद ईश्वर ने मानव–जाति को सचेत कर दिया कि उसकी मृत्यु अवश्यंभावी है, उसे कोई टाल नहीं सकता । परन्तु यह कब और कैसी होगी, इसे रहस्य बना दिया । किन्तु इतिहास के उस काले काल में हिटलर के कॉन्सॅन्ट्रेशन कैम्पों में बन्द लाखों अभागों को यह मालूम था कि उन्हें कब और कैसी मौत मरना है । उन्हें पता था, अमुक दिन, अमुक समय अपने सगे–सम्बन्धियों से सदा–सदा के लिए बिछुड़ी जाना है । मौत को साक्षात् सामने देखकर उन कैदियों की कैसी मन%स्थिति रही होगी ? मौत को करीब पा क्या वे लोग विचलित नहीं हो रहे होंगे ? क्या वे अपने भीतर जीने की ललक समाप्त कर मृत्यु की कामना कर रहे होंगे ? मौत के मुँह की ओर धीरे–धीरे बढ़ते लाखों बच्चों, नवयुवकों, वृद्धाओं की रोंगटे खड़े कर देनेवाली छवियों का संचयन हैµहिटलर का यातना–गृह ! ऐसा यातना–गृह जहाँ हिटलर की क्रूरता का नंगा नाच देखने के लिए अभिशप्त थे कैदी !