あらすじ
"एक मराठा, एक राठौड़ — जब दो महापुरुषों की मित्रता बनी मुग़ल साम्राज्य के अंत की नींव..." यह केवल दो राजाओं की कथा नहीं है, यह है शौर्य, निष्ठा और राष्ट्रभक्ति की ऐसी मिसाल, जो इतिहास के स्वर्णाक्षरों में अंकित है। जब एक ओर से महाराष्ट्र के पहाड़ों में शिवाजी महाराज औरंगज़ेब की नींव हिला रहे थे, तो दूसरी ओर राजस्थान की रेत में वीर दुर्गादास राठौड़ मुग़लों को ललकार रहे थे। क्या होता है जब दो स्वतंत्रता सेनानी, दो रणनीतिकार, और दो नायक — एक लक्ष्य के लिए एक हो जाते हैं? इस पुस्तक में पहली बार उस कल्पनातीत मित्रता, रणनीतिक संवाद और गुप्त योजनाओं का खुलासा होता है, जिसने भारत की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया। 📖 इस पुस्तक में पढ़ें: कैसे शिवाजी और दुर्गादास की पहली भेंट हुई कैसे दोनों ने एक-दूसरे के संघर्ष को समझा, सराहा और समर्थन किया और कैसे इनकी मित्रता बना एक ऐसा अध्याय, जिसे इतिहास ने भुला दिया लेकिन भारतीय माटी ने संजोकर रखा "वीर दुर्गादास और शिवाजी की मित्रता" — केवल इतिहास नहीं, यह एक प्रेरणास्रोत है उन सभी के लिए जो धर्म, राष्ट्र और सम्मान के लिए जीना चाहते हैं।







