गीत प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित ’’श्रीमद् भागवत महापुराण‘‘ का अध्ययन करने के पश्चात भागवत महापुराण को और अधिक जानने तथा समझने की अभिलाषा जागृत हुई, फलस्वरूप भागवत की अन्य पुस्तकों, टीकाओं और लगभग 25 विद्वानों तथा भागवत मर्मज्ञों की पुस्तकों का अध्ययन किया, बहुत से प्रवचनकारों की पुस्तकें भी पढ़ीं। इन सब पुस्तकों के निचोड़ को अपने शब्दों में पिरोने का प्रयास इस पुस्तक में मेरे द्वारा किया गया है, जिसमें मैंने अपनी बुद्धि के अनुसार यथास्थान भजन, चौपाइयों एवं अन्य श्लोकों का समावेश किया है। इस पुस्तक में मेरे द्वारा यह प्रयास किया गया है कि श्रीमद् भागवत महापुराण के समस्त 335 अध्यायों का लेखन किया जाये, संक्षिप्ततम रूप में ही सही ताकि पठन-पाठन एवं प्रवचन में सुविधा हो।