あらすじ
उक्त लिखी सत्य घटना पर आधारित पुस्तक ‘सिर्फ तुम’ समर्पित है उन तमाम प्रेम करने वालों को, जिन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया कि सीमाओं से हटकर प्रेम किया जाये और अपने इस साहस के कारण उनकी गणना तमाम पागलों में ही कर दी गयी। क्योंकि उनके उस पवित्र प्रेम को कभी किसी ने भी समझने का प्रयास ही नहीं किया और समाज क्या, कभी स्वयं उस व्यक्ति ने भी समझने का प्रयास नहीं किया जिसके प्रति प्रेम किया गया। आशा ही नहीं अपितु मुझे पूर्ण विश्वास है कि उक्त पुस्तक को पढ़ने के बाद कुछ हद तक सीमाओं से बाहर जाकर प्रेम करने वाले, जो मैं अपनी इस कहानी के माध्यम से समझाने का प्रयास कर रहा हूँ, शायद समझ पायेंगे और पूर्णरूपेण उस प्रेम को करने का प्रयास किया जायेगा जो अपने आपमें आलौकिक है।यह पुस्तक भविष्य को काफी कुछ सिखाने का प्रयास करेगी। साथ ही साथ उक्त पुस्तक के माध्यम से मैं उन तमाम प्रेम करने वालो को श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहूंगा जिन्होंने सीमाओं के परे जाकर प्रेम किया और प्रेम को ईश्वर माना चाहे भले उन्हें उक्त पवित्र प्रेम के बदले में जीवन भर का दर्द ही क्यों न मिला हो; और श्रद्धांजलि शब्द का प्रयास इसलिए किया है क्योंकि वह व्यक्ति जिन्दा होते हुए भी मरा सा हो गया, क्योंकि उम्मीद से परे जाकर जब भी हृदय को दृवित किया गया है तो फिर बचा ही क्या है?