KishoreKumarKishore
नारी के अनुत्तरित प्रश्न, खुद को तलाशने का प्रयास, पत्रकारिता और राजनीति पर कुछ कटाक्ष, स्वयं की विभ्रमपूर्ण स्थिति को उकेरना, प्रभु को अपने में समाहित पाना... आदि उम्र के समस्त कालखंडों से गुजरती ये पुस्तक आपको समर्पित है।
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