यह पुस्तक भारत में जन्मे विलक्षण प्रतिभाशाली गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी है जिसमें उनकी एक सामान्य परिवार में जन्म से लेकर कैंब्रिज में जाकर पढ़ने और गणित के अकाट्य सूत्रों को प्रस्तुत करने की कहानी है जिस पर अभी तक दुनिया मंथन कर रही है। इस पुस्तक में तत्कालीन समाज, अंग्रेज़ी राज, यूरोप की स्थिति और अकादमिक जगत की हलचलों का भी पता चलता है। इस पुस्तक की भाषा प्रांजल है और इसे युवा वैज्ञानिक डॉ मेहर वान और पत्रकार भारती राठौड़ ने काफी सरल भाषा और बातचीत की शैली में लिखा है जो पाठकों को बांधकर रखती है। विज्ञान, इतिहास, शोध और अकादमिक क्षेत्रों में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह एक ज़रूरी पुस्तक है।